बहुत पहले लिखी गयी कविता के कुछ अंश आज लिखने का मन है -
इस्तकबाल करूँ में उसका
जो चिराग आंधी में झुलसा
फिर भी वह दमका ही दमका !
मैं यहाँ पर अपनी कविताओ का परिचय आपके साथ कराने की कोशिश कर रहा हूँ, आशा करता हूँ की आपको मेरी रचनायें पसंद आयेंगी |
बहुत पहले लिखी गयी कविता के कुछ अंश आज लिखने का मन है -
इस्तकबाल करूँ में उसका
जो चिराग आंधी में झुलसा
फिर भी वह दमका ही दमका !