मेरे सखा बात तो करो
दर्दे दिल अपना बयाँ करो
रूखे रूखे से ना रहा करो
दर्द मेरा भी समझा करो
मेरे पास भी कभी रहा करो
कभी समंदर किनारे चला करो
मेरे साथ तुम भी सपने बुना करो
ओस कि बूंदे निहारा करो
भाव मेरे समझा करो
आंसुओं कि क़द्र जाना करो
इन्हें ऐसे ही ना बहाया करो
राजनीतिक निराशा
10 years ago
7 comments:
हर रंग को आपने बहुत ही सुन्दर शब्दों में पिरोया है, बेहतरीन प्रस्तुति ।
acchhi rachna hai !
Thanks Sanjay and Indranil for your comments :)
पढ़ रहा हूँ भाई राम ।
... बेहतरीन!!!
Thanks Sharad and Uday
बहुत अच्छे गुरु.
मेरे पास भी कभी रहा करो
कभी समंदर किनारे चला करो
मेरे साथ तुम भी सपने बुना करो
वाह वाह...
Post a Comment