Thursday, July 22, 2010

बढता ही जाऊँगा

मैं ना रुकूँगा

ना ही हारूँगा

बस प्रयास के रास्ते

बढता ही जाऊँगा !!

 

सपने संजोकर

कर्मठ की कसौटी पर

आशा के दीप जला

बढता ही जाऊँगा !!

 

नदिया का बहना

सूरज का उगना

सीख लेकर प्रकृति से

बढता ही जाऊँगा !!

मेरी आवाज

10 comments:

anjana said...

nice

प्रवीण पाण्डेय said...

आशावाद से उद्दीप्त हृदय। भहुत उत्साह मिला पढ़ कर।

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

सकारात्मक सोच को लिए सुन्दर अभिव्यक्ति ...

राजभाषा हिंदी said...

बहुत अच्छी प्रस्तुति।
राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है।

राजेश उत्‍साही said...

प्रिय राम भाई,
आपने साखी पर मेरी कविताएं पढ़ीं उन पर प्रतिक्रिया दी। शुक्रिया। मेरा बचपन भी मुरैना जिले की सबलगढ़ तहसील में बीता है।

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

मंगलवार 27 जुलाई को आपकी रचना ... चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर ली गयी है .कृपया वहाँ आ कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ .... आभार

http://charchamanch.blogspot.com/

राम त्यागी said...

धन्यवाद आप सभी के उत्साह वर्धन का !!

वाणी गीत said...

बढ़ते ही जाएँ क्यूंकि बढ़ाना ही जीवन है ...!

दिगम्बर नासवा said...

नदिया का बहना

सूरज का उगना

सीख लेकर प्रकृति से

बढता ही जाऊँगा


बढ़ना ही तो जीवन है ... पीछे मुड़ने का क्या काम ... अनुपम रचना है ...

रंजना said...

प्रेरणादायक ,उर्जा से भरपूर बहुत सुन्दर रचना...