आज कुछ वृद्ध लोंगों को बतियाते देखा
देश से दूर केवल देश की बात करते देखा
अंग्रेजी में देसी लहजे का स्वाद चखते देखा
और फिर अचानक देसी भाषा में चुटियाते देखा
कभी दर्द को उभरते देखा
तो कभी बचपन को याद करते देखा
हर चुटकी में अपनो को दूर होते देखा
बस पुराने लम्हों का अहसास होते देखा
और फिर अचानक से अपने आप को देखा
कल मुझे भी ऐसा होते ही देखा


