Monday, June 21, 2010

मन मीत

मन मीत बड़े प्यारे हो तुम
दिल के नजदीक हो तुम
पास रहकर मैं बता नहीं पाता
दूर जाकर मैं रह नहीं पाता
नदिया में नाव और साथ तेरा
नज्म बन जाए पल का साया  तेरा
सुबह की ओस है तू
रात का चन्दा भी
शाम की बहती बयार भी तू ही
मन का सुकून बिना तेरे अब कहीं ना मिले
जब से देखा तुझको सब कुछ मुझे पराया सा लगे
मेरा मन तुझको ही बस याद करे
दिल की ये बात वो कैसे बयाँ करे




मेरी आवाज

3 comments:

महेन्द्र मिश्र said...

क्या बात है ..बहुत बढ़िया मित्र....बधाई..

ajit gupta said...

बढिया है।

बेचैन आत्मा said...

मासूम अभिव्यक्ति.