Wednesday, June 23, 2010

ब्लॉग्गिंग का बुखार

 

blogging मैं ब्लॉग्गिंग में इतना व्यस्त

पढ़ पढ़ के ब्लॉग हुआ पस्त

घूमूं देता टिपण्णी मस्त मस्त

काम करने के दिन हो गए अस्त

मैं ब्लॉग्गिंग में हुआ इतना व्यस्त

 

मेरी आवाज

11 comments:

अजय कुमार said...

इस व्यस्तता का अलग ही आनंद है ।

Vivek Rastogi said...

काम करने के दिन हो गए अस्त


हा हा बिल्कुल सही, एक एक शब्द कविता का खूब है। :)

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

ब्लॉगिंग में आनन्द बड़ा है!
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बढ़िया छन्द गढ़ा है!

Akshita (Pakhi) said...

ब्लोगिंग है ही इतनी मजेदार चीज..बढ़िया लिखा अपने.

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'पाखी की दुनिया' में 'पाखी का लैपटॉप' देखने जरुर आइयेगा.

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

लागी छूटे न :)

प्रवीण पाण्डेय said...

पस्त हुये ना काम चलेगा,
समय कहाँ विश्राम करेगा,
उठा लेखनी, ब्लॉग जोत दे,
अनुभव को स्थान मिलेगा ।

Anonymous said...

रब खैर करे।
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क्या आप बता सकते हैं कि इंसान और साँप में कौन ज़्यादा ज़हरीला होता है?
अगर हाँ, तो फिर चले आइए रहस्य और रोमाँच से भरी एक नवीन दुनिया में आपका स्वागत है।

अजय कुमार झा said...

सुबह शाम बीस बीस ब्लोग के पठन , पच्चीस पच्चीस टिप्पणियों घिसने का सेवन करिए । बीच बीच में बज का छोटा छोटा डोज़ भी लेते रहेंगे तो बुखार के आनंद में इजाफ़ा होगा । तथास्तु

राम त्यागी said...

@अजय जी, सही कहा आपने , आना बनाए रखिये ...दोस्तों का साथ भी जरूरी है रोग के समय :)

@प्रवीण ..आपने सही तुकबंदी दी :)

ajit gupta said...

काम के दिन अस्‍त हो जाएं तो रात को कर लेना लेकिन ब्‍लागिंग में मस्‍त जरूर रहना।

निर्मला कपिला said...

ांरे मै तो समझी थी अब बुढापे मे हम ही इतने सनकी हो गये हैं कि हर पल ब्लागिन्ग मगर सभी का हाल देख कर लगता है कि मै ठीक ठाक हूँ ये नशा ही ऐसा है। बस लगे रहें। आशीर्वाद।